मोरक्को नरेश ने नेतनयाहू की बैतुल मुक़द्दस की यात्रा की दावत को नज़रअंदाज़ कर दिया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अलसीसी ने नेतनयाहू को यह संदेश भेजा कि क़ाहेरा की यात्रा मुफ्त में नहीं होगी बल्कि इसके लिए उन्हें फ़िलिस्तीनियों को बहुत कुछ देना पड़ेगा जिसमें टू स्टेट सोल्युशन भी शामिल है। हमें अब तक यह नहीं मालूम हो सका कि अबू धाबी की यात्रा रद्द होने के पीछे असली कारण क्या हैं। कहा जा रहा है कि यात्रा टलने क बाद अब हो सकता है कि अगले सप्ताह संपन्न हो।
गुरुवार को इस्राईली सरकारी सूत्रों ने जानकारी लीक की कि नेतनयाहू की यात्रा इसलिए टाल दी गई कि बहुत से इस्राईलियों को कोरोना वायरस की महामारी के कारण आज़ादी से सफ़र करने की अनुमति नहीं है। अब अगर इन हालात में नेतनयाहू अबू धाबी की यात्रा करेंगे तो उन्हें इस्राईलियों की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।
नेतनयाहू के कार्यालय से जारी होने वाले बयान में कहा गया कि नेतनयाहू को इमारात के विदेश मंत्री शैख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ाएद और बहरैन के नरेश शैख़ हमद बिन ईसा से मिलने वाले न्योतों की बड़ी क़द्र है।
मगर इस बात पर ध्यान रखना होगा कि नेतनयाहू की यात्रा तीन बार टाली जा चुकी है और तीन दिवसीय यात्रा को सीमित करके केवल तीन घंटे की यात्रा में बदल दिया गया है। पहले तो नेतनयाहू बहरैन और इमारात जाने वाले थे। इमारात में वह दुबई और अबू धाबी दोनों शहरों की यात्रा करना चाहते थे मगर अब सब कुछ ख़त्म करके केवल अबू धाबी की यात्रा के कार्यक्रम को बाक़ी रखा गया है।
पते की बात यह है कि इस यात्रा को बार बार टाले जाने के कुछ अलग ही कारण हैं। हो सकता है कि इसे कैंसल ही कर दिया जाए। नेतनयाहू के कार्यालय के बयान को देखा जाए तो इसमें बताया गया है कि नेतनयाहू को यात्रा की दावत इमारात के अमीर शैख़ ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद की ओर से नहीं बल्कि इमारात के विदेश मंत्री शैख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ाएद की ओर से मिली। यह प्रोटोकोल के विपरीत उठाया गया क़दम है। क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ाएद ने भी यह निमंत्रण नहीं भेजा। मुहम्मद बिन ज़ाएद ने इस्राईल से शांति समझौते की ज़िम्मेदारी भी अपने विदेश मंत्री को सौंपी। समझौते पर हस्ताक्षर के लिए ख़ुद वाशिंग्टन नहीं गए थे।
अरब सरकारों से जुड़े सूत्रों से मिलने वाली ख़ुफ़िया जानकारियां तो यह बताती हैं कि सऊदी अरब के नियोम शहर में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान और पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो से होने वाली ख़ुफ़िया मुलाक़ात की जानकारी नेतनयाहू ने मीडिया में लीक कर दी जिस पर बिन सलमान बहुत नाराज़ हैं। दूसरा कारण यह है कि बाइडन सरकार ने इमारात से होने वाला एफ़-35 युद्धक विमानों का सौदा स्थगित कर दिया है जिससे अबू धाबी को बड़ी तकलीफ़ है। यह सौदा इस्राईल से इमारात के शांति समझौते का हिस्सा था।
तीसरा कारण यह है कि इस्राईल से शांति समझौते करने वाली अरब सरकारों को धीरे धीरे एहसास हो रहा है कि उनके इस फ़ैसले से देश के भीतर आम जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। इसलिए कि समझौते का एकतरफ़ा फ़ायदा इस्राईल को मिला है। यह समझौता करवाने वाली ट्रम्प सरकार का पत्ता साफ़ हो चुका है। अब अमरीका में जो सरकार आई है उसकी प्राथमिकताएं अलग हैं। बाइडन सरकार मानवाधिकार और यमन युद्ध के मुद्दे पर सऊदी अरब को घेरने की तैयारी में है।
सत्ता संभाले हुए तीन सप्ताह का समय हो रहा है मगर अब तक बाइडन ने नेतनयाहू से बात करने के लिए फ़ोन उठाने का कष्ट नहीं किया है जो कि अमरीका इस्राईल संबंधों के इतिहास में बिल्कुल नई मिसाल है। इसके बहुत से राजनैतिक निहितार्थ हैं। अब इन हालात में क्या अरब सरकारें नेतनयाहू का स्वागत करके खुद को जोखिम में डालने की हिम्मत कर कर पाएंगी?
अरब सरकारों से बहुत बड़ी भूल हुई कि उन्होंने ट्रम्प सरकार के सहारे बहुत बड़ा जुआ खेला। उन्हें चुनाव जिताने के लिए इस्राईल से समझौता तक कर डाला जिस पर इन देशों की जनता में गहरा आक्रोश है। अरब सरकारें यह जुआ हार गईं। इससे पता चलता है कि यह सरकारें हालात को समझने और भविष्य को आंकने में कितनी अक्षम हैं और अब उन्हें अपनी भारी ग़लती के कारण दिन में तारे दिखाई देने लगे हैं।
स्रोतः रायुल यौम